सर नमस्ते! लाइब्रेरी जाना था - Shimla Times

Saturday, May 18, 2019

सर नमस्ते! लाइब्रेरी जाना था

शिमला—सर नमस्ते मैं एसबीएस ब्वायज होस्टल से बात कर रहा हूं। रात को दस बजे के बाद पुस्तकालय जाने के लिए परमिशन ली थी, लेकिन जाने नहीं दिया जा रहा है। होस्टल के वार्डन दस बजे के बाद गेट से एंट्री नहीं दे रहे हैं। वार्डन का कहना है कि चीफ वार्डन यानी की आपने मना कर दिया है। यह ओडियो प्रदेश विश्वविद्यालय के चीफ वार्डन और ट्राइबल होस्टल में पढ़ने वाले एक छात्र के बीच हुई बहस व बातचीत की वायरल हुई है। इस ओडियो क्लिप के माध्यम से ट्राइबल होस्टल में पढ़ने वाले छात्र का आरोप है कि केवल उक्त होस्टल के छात्रों के साथ ही भेदभाव किया जा रहा है। वहीं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करना छात्रों के लिए मुश्किल हो गया है। बता दें कि ट्राइबल होस्टल में पढ़ने वाले छात्रों का आरोप है कि एचपीयू के निर्देशों के अनुसार कई छात्रों ने प्रशासन से रात को होस्टल में जाने की परमिशन भी ली, लेकिन बावजूद इसके अन्य होस्टल के छात्रों को लाइब्रेरी में जाने दिया जा रहा है और एसबीएस होस्टल के जो छात्र परमिशन के बाद जाना चाहते हैं, उन्हें धमकी दी जा रही है कि दस बजे के बाद होस्टल से एंट्री नहीं होगी, जबकि एसबीएस के दर्जनों छात्रों को दस बजे के बाद पुस्तकालय में जाने के लिए एचपीयू की ओर से परमिशन दे दी गई है।

चीफ वार्डन व ओडियो क्लिप की बातचीत के कुछ अंश

 सर नमस्ते एसबीएस से बात कर रहा हूं, लाइब्रेरी जाने के लिए परमिशन ली थी, लेकिन जाने नहीं दिया जा रहा है। वार्डन द्वारा यह बोला जा रहा है कि आपने मना किया है। 

 चीफ वार्डन-यह ऑर्डर मेरे नहीं हैं, फाइंडिंग कमेटी के ऑर्डर हैं और जब तक कमेटी ऑर्डर नहीं देती है, मैं कोई भी फैसला नहीं ले सकता।

 छात्र- सर हम चंबा, भरमौर से इतनी दूर यहां पढ़ने आए  हैं और सर मेरा नाम न तो किसी पार्टी के साथ जुड़ा है, और न ही किसी लड़ाई में फिर क्यों नहीं जाने दिया जा रहा है।

 चीफ वार्डन – जब तक इस मामले पर रीटन में कोई ऑर्डर नहीं आ जाते हैं, मैं कोई परमिशन नहीं दे सकता।

 छात्र- सर हम छात्र हैं यहां पढ़ने आए कोई बम फेंकने थोड़ी नहीं जाएंगे।

 चीफ वार्डन – तुझे समझ नहीं आता, तमीज नहीं बात करने की।

एसएफआई ने भेदभाव का लगाया आरोप

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की एसएफआई इकाई का आरोप है कि शहीद भगत सिंह होस्टल के छात्रों को रात दस बजे के बाद बावजूद अनुमति के भी ट्वेंटी फोर आवर लाइब्रेरी नहीं जाने दिया जा रहा है। कार्यकताओं का आरोप है कि बीते दिनों जब सभी होस्टलों के चीफ  वार्डन से इसलिए मिले थे, कि होस्टलों के गेट को चौबीस घंटे खुला रखा जाए, लेकिन उसी दिन मौखिक रूप से सिर्फ जनजातीय होस्टल में यह फरमान जारी किया गया कि चाहे अनुमति भी हो किसी भी छात्र को लाइब्रेरी न जाने दिया जाए।

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