शिक्षक दिवस पर 12 शिक्षक राज्यस्तरीय पुरस्कार से सम्मानित

शिक्षक दिवस के अवसर पर शिमला में आयोजित राज्यस्तरीय समारोह के दौरान राज्यपाल श्री कलराज मिश्र जी ने मुख्यमंत्री श्री जयराम ठाकुर जी की उपस्थिति में 12 शिक्षकों को राज्य स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित किया। राज्यपाल ने कहा कि तकनीकी ज्ञान और उसका उपयोग समय की मांग है, लेकिन इससे भी महत्त्वपूर्ण यह है कि आत्मिक संबंधों को हर कीमत पर बनाए रखा जाए। यह शिक्षकों पर निर्भर करता है कि वह विद्यार्थियों को गुणात्मक शिक्षा के साथ-साथ नैतिकता पर बल दें ताकि भारतीय संस्कृति के अनुरूप अच्छे समाज का निर्माण किया जा सके, जैसे कि पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन् की सोच थी। उनका कहना था कि शिक्षक ज्ञान का स्रोत और समवाहक होते हैं, जिन्हें भारतीय संस्कृति के अनुरूप नैतिक संस्कार देने और गुणात्मक शिक्षा को स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयासरत रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज जिन शिक्षकों को सम्मानित किया गया, निश्चित तौर पर उन्होंने गुणात्मक शिक्षा की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया है, जिसके लिए वे बधाई के पात्र हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में व्यक्तित्व विकास और आत्मविश्वास बढ़ाने का कार्य एक शिक्षक कर सकता है। यही आत्मविश्वास जीवन में सफलता का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने कहा कि डॉ. राधाकृष्णन् ने नैतिकता का पाठ पढ़ाया और उनका मानना था कि नैतिकता से ही अनुशासन आता है।
बच्चों पर परोक्ष रूप से पड़ता है शिक्षक के व्यवहार व संस्कार का प्रभाव: राज्यपाल
राज्यपाल ने कहा कि अभिभावक के बाद बच्चों को अपने शिक्षकों से संस्कार मिलते हैं, जो अपने शिक्षकों का गंभीरता से अनुसरण करते हैं। शिक्षक के व्यवहार और संस्कार का प्रभाव परोक्ष रूप से बच्चों पर पड़ता है और यही संस्कार बाद में उनकी पहचान बनते हैं। इसलिए, विद्यार्थी, शिक्षक और अभिभावक तीनों का अंतरसंबंध बनता है। उन्होंने शिक्षकों का आह्वान किया कि वे बच्चों की प्रतिभा को निखारने और उन्हें प्रोत्साहित करने का कार्य निष्ठापूर्वक करें। उन्हें अध्ययन के लिए प्रेरित करें, क्योंकि पढ़ने से विचारशीलता आती है और नवाचारों का उदय होता है। श्री कलराज मिश्र जी ने कहा कि अच्छे और जिम्मेदार नागरिक तैयार करना शिक्षा का आधार होना चाहिए। बच्चों का विकास इस रूप में आवश्यक है कि वे बड़े होकर सशक्त राष्ट्र के निर्माण में योगदान दें।

शिष्यों को उच्च नैतिक मूल्य व संस्कार भी दें शिक्षक : राज्यपाल 
पुरस्कार से सम्मानित शिक्षकों को बधाई देते हुए राज्यपाल ने शिक्षक समुदाय का आहवान किया कि वे अधिक प्रतिबद्धता के साथ कार्य करें ताकि गुणात्मक शिक्षा प्रदान करने के साथ-साथ वे अपने विद्यार्थियों को उच्च नैतिक मूल्य व संस्कार दे सकें। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी बहुत जिज्ञासु होते हैं और बचपन में उन्हें जो सिखाया-बताया जाता है, उसका प्रभाव जीवनभर रहता है। इसलिए यह आवश्यक है कि अध्यापक उनके लिए प्रेरणा का स्त्रोत बनें और उनमें अध्ययन, सदाचार व अनुशासन की भावना जागृत करें। इसके साथ ही युवा पीढ़ी को हमारे देश की समृद्ध संस्कृति और वैभवशाली इतिहास के बारे में भी जागरूक करना भी शिक्षकों का उत्तरदायित्व है ताकि उनमें राष्ट्र भक्ति व स्वदेश प्रेम की भावना उत्पन्न हो। उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि हिमाचल प्रदेश ने विभिन्न क्षेत्रों में चहुमुखी तरक्की की है और विशेषकर शिक्षा के क्षेत्र में कई आयाम स्थापित किए हैं, जिसमें शिक्षकों का बड़ा योगदान है। राज्यपाल ने इस अवसर पर एक स्मारिका का विमोचन भी किया।
डॉ. एस. राधाकृष्णन जी से जुड़ा है आज का दिन : मुख्यमंत्री
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री जयराम ठाकुर जी ने कहा कि 5 सितम्बर का दिन डॉ. एस. राधाकृष्णन जी से जुड़ा है जो एक महान दार्शनिक, विद्वान और शिक्षाविद् थे। उन्होंने कहा कि डॉ. राधाकृष्णन एक दक्ष वक्ता, सफल कूटनीतिज्ञ, प्रशासक, प्रभावशाली राजनीतिज्ञ और प्रख्यात लेखक थे, जिनके लिए शिक्षा एक व्यवसाय नहीं बल्कि एक मिशन था जिसे प्रति वह पूरी तरह समर्पित थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम उनका जन्मदिन शिक्षक दिवस के रुप में मनाते हैं ऐसे में यह समझना आवश्यक है कि शिक्षा के बारे में उनकी सोच व दृष्टिकोण को समझा जाए। शिक्षा से उनका अभिप्राय व्यक्तिगत तौर पर और विश्व स्तर पर एकीकरण है ताकि व्यक्ति एक आदर्श नागरिक बन सकें।
अधिकार और कर्तव्य के प्रति जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है शिक्षा : मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री श्री जयराम ठाकुर जी ने कहा कि शिक्षा लोगों को अधिकार और कर्तव्य के प्रति जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का ध्येय लोगों को समाज की कार्यप्रणाली को समझने में सशक्त बनाना होना चाहिए। शिक्षा का उद्देश्य न केवल विद्यार्थियों को डिग्री हासिल करने और रोजगार देना है, बल्कि यह युवाओं में अनुसंधान की भावना, तर्कसंगत सोच को विकसित करके उन्हें समाज में हो रहे बदलावों व कमियों को दूर करने में सहायक सिद्ध होती है। उन्होंने शिक्षक वर्ग का आह्वान किया कि शिक्षा के प्रचार-प्रसार में अपना सक्रिय योगदान दें। उन्होंने कहा कि शिक्षक ही छात्रों को नैतिक शिक्षा देकर एक जिम्मेदार नागरिक बना सकते हैं।

छात्राओं को सांस्कृतिक गतिविधियों के प्रोत्साहन के लिए 31-31 हजार रुपए देने की घोषणा
मुख्यमंत्री ने राजकीय कन्या महाविद्यालय और पोर्टमोर स्कूल शिमला की छात्राओं को सांस्कृतिक गतिविधियों के प्रोत्साहन के लिए 31-31 हजार रुपये देने की घोषणा की। जिन्होंने इस अवसर पर रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। प्रधान सचिव शिक्षा श्री के.के. पन्त ने शिक्षा विभाग की विभिन्न गतिविधियों और उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। निदेशक प्रारम्भिक शिक्षा श्री रोहित जम्वाल ने धन्यवाद प्रस्ताव रखा। स्कूली विद्यार्थियों ने इस अवसर पर रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए।

इन शिक्षकों को मिला सम्मान
यजनीश कुमार, प्रवक्ता वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला, जन्दूर, जिला हमीरपुर, सत्यपाल सिंह प्रवक्ता व.मा.पा कण्डाघाट जिला सोलन, सन्तोष कुमार चैहान, डीपीईए व.मा.पा समरहिल जिला शिमला, नेत्र सिंह टीजीटी, व.मा.पा कमान्द, जिला मंडी, नन्द किशोर शास्त्री व.मापा. कुनिहार, जिला सोलन, जितेन्द्र मनहास जेबीटी प्राथमिक पाठशाला नेरी, जिला ऊना, विजयपुरी जेबीटी, प्राथमिक पाठशाला खारटी, जिला कांगड़ा, नारायण दत्त जेबीटी प्राथमिक पाठशाला लाणा मियूता जिला सिरमौर, आशा राम जेबीटी प्राथमिक पाठशाला नन्द जिला बिलासपुर, प्रदीप मुखिया जेबीटी प्राथमिक पाठशाला रोहडू जिला शिमला, युद्धवीर जेबीटी प्राथमिक पाठशाला सुन्दला जिला चम्बा, नरेश कुमार टीजीटी माध्यमिक पाठशाला, सिराज-2 जिला मंडी।




courtesy: CMO Himachal http://www.cmohimachal.com/2019/09/12.html

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