छोटे बच्चों का दुश्मन बना डायरिया

डीडीयू और आईजीएमसी में बदलते मौसम के चलते रोजाना आ रहे पांच से छह मामले

शिमला -राजधानी शिमला में बदलते मौसम के चलते छोटे बच्चों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। शिमला के अस्पतालों में इन दिनों छोटे बच्चों में डायरिया के अधिक मामले आ रहे हैं। डीडीयू व आईजीएमसी में दिन में पांच से छह मामले बच्चों में डायरिया के ही आ रहे हैं। सर्दियों के मौसम में कई तरह के खतरनाक वायरस भी एक्टिव हो जाते हैं। सर्दी का सबसे ज्यादा असर छोटे बच्चों पर पड़ता है। अगर बच्चों की सही तरह से देखभाल न की जाए, तो वे गंभीर बीमारी की चपेट में आ सकते हैं। सर्दियों के मौसम में ‘विंटर डायरिया’ एक ऐसी बीमारी है, जो बच्चों को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है। यह डायरिया का ही एक प्रकार होता है, लेकिन सर्दियों में ही इसका वायरस पूरी तरह से एक्टिव होता है। रोटा वायरस के कारण यह बीमारी फैलती है। इसके कारण बच्चे को उल्टी, दस्त, दवाइयों का असर न होना, शरीर में पानी की कमी, कमजोरी, भूख न लगना आदि परेशानी शुरू हो सकती हैं। अगर समय पर उपचार न किया जाए या बीमारी की पहचान समय रहते न हो, तो इससे गंभीर समस्या शुरू हो सकती है। इसलिए इस बीमारी में बचाव ही बेहतर उपचार होता है। इसकी पहचान सिर्फ इतनी है कि बच्चे को शुरुआती दौर में उल्टी होती है। उसके बाद दस्त होते हैं, जो एक दिन में कई बार हो सकते हैं। बुखार आना भी इसका एक मुख्य लक्षण है। अगर सर्दियों में छोटे बच्चों में इस तरह के लक्षण दिखाई दें, तो समझ लीजिए कि वे विंटर डायरिया की चपेट में हैं। खासकर एक साल की उम्र से कम के बच्चे इस बीमारी की चपेट में ज्यादा आते हैं। इसलिए सर्दियों के मौसम में छोटे बच्चों का विशेष ख्याल रखना जरूरी होता है। रोटा वायरस दुनिया भर में पाया जाने वाला एक आम वायरस है। इस वायरस से ग्रस्त होने पर बच्चे के शरीर में नमक और पानी की कमी हो जाती है। अगर समय पर उपचार न मिले तो मौत भी हो सकती है। रोटा वायरस संक्रमित हाथ, खिलौने, दूध की बोतल, गंदे कपड़े, संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से फैलता है। इसका टीका उपलब्ध है और उपचार के माध्यम से यह ठीक भी हो सकता है।

 

 

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Courtsey: Divya Himachal

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